sunset, ponte de lima, portugal

ख़ालीपन

बेकार कहें ये लोग मुझेकहें,कोई काम नहीं आता,तन्हा ही बैठा रहे हमेशागुमसुम-सा फिरता रहता है,वो समझें मैं बर्बाद हुआऔर मैं,मैं देखता हूँ जब शख्स कोईतो सोचता हूँहर एक की वही रवानी है,वही सुबह अखबार में खोईदफ्तर से शाम थकी आईऔर रात को बड़ा गहरा ग़म हैमानोआती सुबह कोई मातम है,चाभी-भरी घड़ी हो जैसेआदमी भी चलता …

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