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sand, sea, solitude-4162530.jpg

ग़ज़ल:- उसने क्या कीमत दी मिरी बर्बादी की

तय्यारी हुई शुरू तुम्हारी शादी कीहो गई शुरू मुहिम मेरी बर्बादी की तेरी गली के बाहर खुद से मिला था मैंअर्से बाद अंगड़ाई ली आज़ादी की अरसा बीत गया था अरसा बिताने मेंझूठी बात हुई वक़्त की बादशाही की तुम तो हरगिज़ याद नहीं मुझको,लेकिनधुंधली तस्वीर याद है इक शहज़ादी की मुझे ही क्यों सारी …

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poem, butterfly, literature

अनबन

मिरे सर से ये असर क्यों नहीं जाताबचा है जो मुख़्तसर क्यों नहीं जाता रहा खोया इश्क़ में मैं सभी भूलाबहुत सोचूँ ये कि मर क्यों नहीं जाता सुनी किसने आहटें वक़्त की फिर भीनहीं है जो वो ही डर क्यों नहीं जाता मुहब्बत रह ज़िन्द मंज़िल मगर यह क्यासफर से और इक सफ़र क्यों …

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heidelberg, autumn, view

कभी कभी दिल घबराएगा

कभी कभी दिल घबराएगासब कुछ बेजा नज़र आएगातन्हाई घेरे जो कभी, तोहाथ तलाशे साथ कहीं, तोआँखों में सागर उतरे, तोकतरा-कतरा दिल बिखरे, तोपरछाई जब साथ नहीं देजान रहे पर साँस नहीं लेजिस्म से जैसे रूह भी छूटेतेरा तुझसे रब्त भी टूटेदूर तलक़ कुछ नज़र न आयेवीराना हर स्वप्न जलाएतब तुम मुझको याद में लानामेरे इश्क़ …

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bed, bloom, flower

तुम्हारे नाम के साथ एक ज़िन्दगी

ख़्वाब देखा करो ख्वाहिशें करते चलोऔर हौले-हौले ज़िन्दगी में ढलते रहोउम्मीद घना एक कोहरा हैख़ुशनुमा मगर एक कोहरा हैधुँधला एक लंबा सफ़र करते रहोगिरी शाख की जगह से फिर पीक आएगा क्या?पता नहीं, लेकिन पुरानी शाख गिराकरएक नया अरमान लिए चलते रहोसारी इच्छाएँ चाहतें नदिया सी हैंकौन कहाँ गुम हो जाए ?किसमें कौन-सी मिल जाए …

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quill, pen, write

कहानी-बूँद बूँद ज़िन्दगी

सुनो? ज़रा उधर देखो, कितना प्यारा नज़ारा है! एक तरफ सूरज दूसरी तरफ चंद्रमा,नीचे लहराता समंदर और यहाँ धरती पर साथ में बैठे हम । पीछे देखूँ तो मुझे अब तक की अपनी सारी ज़िन्दगी में इससे खूबसूरत लम्हा नहीं दिखता । कुछ देर चुप रहकर मैं फिर कहता हूँ। अच्छा,ऐसा तो नहीं कि तुम्हें …

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sunset, ponte de lima, portugal

ख़ालीपन

बेकार कहें ये लोग मुझेकहें,कोई काम नहीं आता,तन्हा ही बैठा रहे हमेशागुमसुम-सा फिरता रहता है,वो समझें मैं बर्बाद हुआऔर मैं,मैं देखता हूँ जब शख्स कोईतो सोचता हूँहर एक की वही रवानी है,वही सुबह अखबार में खोईदफ्तर से शाम थकी आईऔर रात को बड़ा गहरा ग़म हैमानोआती सुबह कोई मातम है,चाभी-भरी घड़ी हो जैसेआदमी भी चलता …

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address book, notebook, notes

ग़ज़ल:- जो जरूरी नहीं वो भी कर देखिए

जो जरूरी नहीं वो भी कर देखिएबस सियासी नशे में उतर देखिए नफ़रतों में जले घर कई रंग भरेघुल गया है नसों में ज़हर देखिए हर नज़र शक़ भरी हर डगर डर भरीटूटने में कहाँ है कसर देखिए आदमी से घिरा आदमी देखिएजी रहे सहरा का ये बसर देखिए दिल्ली दिल से कहे बिल नहीं …

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book, poems, persian poet

नज़्म:-‘जागते-जागते इक उम्र कटी हो जैसे’

जाने क्या बात इशारात करे है दिल मेंआहटें द्वार करे बेज़ार करे पल-पल मेंहिज़्र की रात में अक्सर ये गुमाँ होता हैवो है यहीं छुपके मुझे देख रही हो जैसेबंद आँखें यही महसूस किया करती हैकानों के करीब तेरी साँस उठी हो जैसेख़ाब की बात भी लगती है मुझे ख़ाबों-सीतुझको न देखके आँखें भी पिघलती …

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गुलाब और तुम

पेड़ ने कब चाहा था,काँटों को,लेकिन,एक गुलाब खिलाने को,कितने काँटों को सींचा था,आसमाँ को ताकते गुलाब ने,कभी देखा ही नहीं,तुम भी तो नहीं जानती हो,तुम्हारे अनजाने रूठे मन को,मनाने को,तेरी मुस्कान का प्यासा मेरा मन,कितना रूठा है मुझसे

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कोरोना और मंथन
(आकाश, नदी और मानव का)

मेरा रंग आसमानी हैमैं ये भूला था बरसों सेगए इन कुछ दिनों में परन जाने क्या हुआ ऐसामेरे दामन की सब कालिख़मिली थी जो मुझे जबरनमिटी कुछ इस सलीखे सेनदी को आईना करकेनिहारा मैंने जब खुद कोमुझे ऐसा लगा जैसेनया एक जन्म पाया होकि जैसे श्राप-मुक्ति सेपुनः देवत्व पाया हो मैं जीवनदायिनी सबकीमुझे माता पुकारें …

कोरोना और मंथन
(आकाश, नदी और मानव का)
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