hindi poem

lilies, dream, white-416625.jpg

हसरतों की कोई हद तो दिखती नहीं

हसरतों की कोई हद तो दिखती नहींझील ये चाहती है कि सागर मिलेआँख ढूँढ़े कोई तेरी तस्वीर हाँदिल से मैंने कहा अब तू आहें न भररात है ये ज़रा सी गुजर जाने देवो सवेरा है रातों को धो जाएगी

sand, sea, solitude-4162530.jpg

ग़ज़ल:- उसने क्या कीमत दी मिरी बर्बादी की

तय्यारी हुई शुरू तुम्हारी शादी कीहो गई शुरू मुहिम मेरी बर्बादी की तेरी गली के बाहर खुद से मिला था मैंअर्से बाद अंगड़ाई ली आज़ादी की अरसा बीत गया था अरसा बिताने मेंझूठी बात हुई वक़्त की बादशाही की तुम तो हरगिज़ याद नहीं मुझको,लेकिनधुंधली तस्वीर याद है इक शहज़ादी की मुझे ही क्यों सारी …

ग़ज़ल:- उसने क्या कीमत दी मिरी बर्बादी की Read More »

season, children, leaves

नज़्म:- हक़-ए-इंतज़ार दिया है तुमने

हक़-ए-इंतज़ार दिया है तुमनेख़ातिर फ़िराक़-ए-वस्लज़रिया न बताया गोयाथमने का मुसलसल साँसइक माकूल तरीका जीने काएक बेग़ैरत-सी मौततन्हाई में तन्हा नहीं मैंखौफ़ नहीं दे खौफ़इश्क़ के फूल उगे जिन शाखों परवहीं जमे ज़िन्दगी के शूल देखोख़बर देर से देते हो ये ठीक है, मगरहाल भी तो कभी अपना मक़बूल लिखो शब्दार्थ:- फ़िराक़ ए वस्ल – मिलन …

नज़्म:- हक़-ए-इंतज़ार दिया है तुमने Read More »

poem, sadness, literature

क़िसमत तब मुझसे नाराज़ बड़ी थी

क़िसमत तब मुझसे नाराज़ बड़ी थीजब,कि तू मेरे साथ साथ खड़ी थी ना भूलने की इक इबादत की थी सोअब याद करने को इक उम्र पड़ी थी मौत हुई थी, मेरे कहने पर,जबतू मेरे कूचे से गुजर पड़ी थी मेरी लंबी उम्र की चाहत थी तेरीतेरी मज़ार पे इक लाश खड़ी थी याद थी नेहार्य …

क़िसमत तब मुझसे नाराज़ बड़ी थी Read More »

poem, butterfly, literature

अनबन

मिरे सर से ये असर क्यों नहीं जाताबचा है जो मुख़्तसर क्यों नहीं जाता रहा खोया इश्क़ में मैं सभी भूलाबहुत सोचूँ ये कि मर क्यों नहीं जाता सुनी किसने आहटें वक़्त की फिर भीनहीं है जो वो ही डर क्यों नहीं जाता मुहब्बत रह ज़िन्द मंज़िल मगर यह क्यासफर से और इक सफ़र क्यों …

अनबन Read More »

heidelberg, autumn, view

कभी कभी दिल घबराएगा

कभी कभी दिल घबराएगासब कुछ बेजा नज़र आएगातन्हाई घेरे जो कभी, तोहाथ तलाशे साथ कहीं, तोआँखों में सागर उतरे, तोकतरा-कतरा दिल बिखरे, तोपरछाई जब साथ नहीं देजान रहे पर साँस नहीं लेजिस्म से जैसे रूह भी छूटेतेरा तुझसे रब्त भी टूटेदूर तलक़ कुछ नज़र न आयेवीराना हर स्वप्न जलाएतब तुम मुझको याद में लानामेरे इश्क़ …

कभी कभी दिल घबराएगा Read More »

bed, bloom, flower

तुम्हारे नाम के साथ एक ज़िन्दगी

ख़्वाब देखा करो ख्वाहिशें करते चलोऔर हौले-हौले ज़िन्दगी में ढलते रहोउम्मीद घना एक कोहरा हैख़ुशनुमा मगर एक कोहरा हैधुँधला एक लंबा सफ़र करते रहोगिरी शाख की जगह से फिर पीक आएगा क्या?पता नहीं, लेकिन पुरानी शाख गिराकरएक नया अरमान लिए चलते रहोसारी इच्छाएँ चाहतें नदिया सी हैंकौन कहाँ गुम हो जाए ?किसमें कौन-सी मिल जाए …

तुम्हारे नाम के साथ एक ज़िन्दगी Read More »

quill, pen, write

कहानी-बूँद बूँद ज़िन्दगी

सुनो? ज़रा उधर देखो, कितना प्यारा नज़ारा है! एक तरफ सूरज दूसरी तरफ चंद्रमा,नीचे लहराता समंदर और यहाँ धरती पर साथ में बैठे हम । पीछे देखूँ तो मुझे अब तक की अपनी सारी ज़िन्दगी में इससे खूबसूरत लम्हा नहीं दिखता । कुछ देर चुप रहकर मैं फिर कहता हूँ। अच्छा,ऐसा तो नहीं कि तुम्हें …

कहानी-बूँद बूँद ज़िन्दगी Read More »

sunset, ponte de lima, portugal

ख़ालीपन

बेकार कहें ये लोग मुझेकहें,कोई काम नहीं आता,तन्हा ही बैठा रहे हमेशागुमसुम-सा फिरता रहता है,वो समझें मैं बर्बाद हुआऔर मैं,मैं देखता हूँ जब शख्स कोईतो सोचता हूँहर एक की वही रवानी है,वही सुबह अखबार में खोईदफ्तर से शाम थकी आईऔर रात को बड़ा गहरा ग़म हैमानोआती सुबह कोई मातम है,चाभी-भरी घड़ी हो जैसेआदमी भी चलता …

ख़ालीपन Read More »

address book, notebook, notes

ग़ज़ल:- जो जरूरी नहीं वो भी कर देखिए

जो जरूरी नहीं वो भी कर देखिएबस सियासी नशे में उतर देखिए नफ़रतों में जले घर कई रंग भरेघुल गया है नसों में ज़हर देखिए हर नज़र शक़ भरी हर डगर डर भरीटूटने में कहाँ है कसर देखिए आदमी से घिरा आदमी देखिएजी रहे सहरा का ये बसर देखिए दिल्ली दिल से कहे बिल नहीं …

ग़ज़ल:- जो जरूरी नहीं वो भी कर देखिए Read More »

error: copy क्यों कर रहे हो?
Scroll to Top