rose, blossom, bloom

गुलाब और तुम

पेड़ ने कब चाहा था,काँटों को,लेकिन,एक गुलाब खिलाने को,कितने काँटों को सींचा था,आसमाँ को ताकते गुलाब ने,कभी देखा ही नहीं,तुम भी तो नहीं जानती हो,तुम्हारे अनजाने रूठे मन को,मनाने को,तेरी मुस्कान का प्यासा मेरा मन,कितना रूठा है मुझसे