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ग़ज़ल-जितने दर्दे-दिल के यहाँ फ़साने हैं

जितने दर्दे-दिल के यहाँ फ़साने हैंपास मेरे जीने के उतने बहाने हैं कौन कहता है मुश्किल मुहब्बत को पानाबस कायदे इश्क़ के ज़रा मनमाने हैं हम दोनों में कुई पहचान पुरानी हैवरना इस दुनिया में कितने अजाने हैं गरज़ है मेरी तेरे शिकवे सुनने कीतेरी आवाज़ के कान मेरे दिवाने हैं बादल अपनी तड़प गरज …

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