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हसरतों की कोई हद तो दिखती नहीं

हसरतों की कोई हद तो दिखती नहींझील ये चाहती है कि सागर मिलेआँख ढूँढ़े कोई तेरी तस्वीर हाँदिल से मैंने कहा अब तू आहें न भररात है ये ज़रा सी गुजर जाने देवो सवेरा है रातों को धो जाएगी

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ग़ज़ल:- उसने क्या कीमत दी मिरी बर्बादी की

तय्यारी हुई शुरू तुम्हारी शादी कीहो गई शुरू मुहिम मेरी बर्बादी की तेरी गली के बाहर खुद से मिला था मैंअर्से बाद अंगड़ाई ली आज़ादी की अरसा बीत गया था अरसा बिताने मेंझूठी बात हुई वक़्त की बादशाही की तुम तो हरगिज़ याद नहीं मुझको,लेकिनधुंधली तस्वीर याद है इक शहज़ादी की मुझे ही क्यों सारी …

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शुब्ह:

खुश होंतोकिसी के साथ भी हँस लेते हैंदुःख में ही किसीअपने की याद आती हैउस दिनतुमने बात नहीं की थी मुझसेशायद,मैं कभी तुम्हारा था ही नहीं…! शब्दार्थ:- शुब्ह: मने संदेह/शक

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नज़्म:- हक़-ए-इंतज़ार दिया है तुमने

हक़-ए-इंतज़ार दिया है तुमनेख़ातिर फ़िराक़-ए-वस्लज़रिया न बताया गोयाथमने का मुसलसल साँसइक माकूल तरीका जीने काएक बेग़ैरत-सी मौततन्हाई में तन्हा नहीं मैंखौफ़ नहीं दे खौफ़इश्क़ के फूल उगे जिन शाखों परवहीं जमे ज़िन्दगी के शूल देखोख़बर देर से देते हो ये ठीक है, मगरहाल भी तो कभी अपना मक़बूल लिखो शब्दार्थ:- फ़िराक़ ए वस्ल – मिलन …

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poem, sadness, literature

क़िसमत तब मुझसे नाराज़ बड़ी थी

क़िसमत तब मुझसे नाराज़ बड़ी थीजब,कि तू मेरे साथ साथ खड़ी थी ना भूलने की इक इबादत की थी सोअब याद करने को इक उम्र पड़ी थी मौत हुई थी, मेरे कहने पर,जबतू मेरे कूचे से गुजर पड़ी थी मेरी लंबी उम्र की चाहत थी तेरीतेरी मज़ार पे इक लाश खड़ी थी याद थी नेहार्य …

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poem, butterfly, literature

अनबन

मिरे सर से ये असर क्यों नहीं जाताबचा है जो मुख़्तसर क्यों नहीं जाता रहा खोया इश्क़ में मैं सभी भूलाबहुत सोचूँ ये कि मर क्यों नहीं जाता सुनी किसने आहटें वक़्त की फिर भीनहीं है जो वो ही डर क्यों नहीं जाता मुहब्बत रह ज़िन्द मंज़िल मगर यह क्यासफर से और इक सफ़र क्यों …

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sunset, wedding, silhouettes

अरेंज मैरिज

ख़ुदा का करम याकहो इश्क़ का सितमतुम्हें मिलना था इस तरहसबकी रज़ा अपनी खुशीये करामातें इश्क़ कीन-जान सका कोईपहचान सका कोईकभी जंगल-सी उगती हैकभी गमलों में खिलाई गईरास्ते खुद ही चुनती हैदिल में आप महकती हैया महक दिल तक पहुँचाती हैतेरे-मेरे मिलने का दूसरा ज़रिया थातुमको मुझ तक पहुँचाया गयामुझको तुमसे मिलवाया गयापर हमारा मिलना …

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daisy, flower, hand

शुक्रिया बेस्ट ऑफ लक

मेरी हारों से मत घबरामत सोच इतनामेरे बेस्ट ऑफ लकतुझमें कोई कमी नहीं थीकि मैं अव्वल न आ सकामुक़द्दर कोई झील नहींगहरा एक दरया हैइस दरया में डूबता-उतरता मैंजो अब भी ज़िन्दा हूँतो ये तेरा ही करिश्मा हैमेरे बेस्ट ऑफ लक

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