कविता

quill, pen, write

कहानी-बूँद बूँद ज़िन्दगी

सुनो? ज़रा उधर देखो, कितना प्यारा नज़ारा है! एक तरफ सूरज दूसरी तरफ चंद्रमा,नीचे लहराता समंदर और यहाँ धरती पर साथ में बैठे हम । पीछे देखूँ तो मुझे अब तक की अपनी सारी ज़िन्दगी में इससे खूबसूरत लम्हा नहीं दिखता । कुछ देर चुप रहकर मैं फिर कहता हूँ। अच्छा,ऐसा तो नहीं कि तुम्हें …

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nature, waters, lake

आज बरस कर बादल ने किसकी सुनी फरियाद दुआ

आज बरस कर बादल ने किसकी सुनी फरियाद दुआआह सुनी धरती की या अपने मिलन से चूर हुआभीगे हम-तुम साथ जहाँ के पर देखो क्या हुआ असरदहक उठा सारा आलम बस हम दोनों में प्यार हुआ चाहत थी तुम मेरी बनो पूरी ये मनुहार हुईसाथ तुम्हारे ये दुनिया देखते ही संसार हुईतेरे नैना दर्पण मेरा …

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sunset, ponte de lima, portugal

ख़ालीपन

बेकार कहें ये लोग मुझेकहें,कोई काम नहीं आता,तन्हा ही बैठा रहे हमेशागुमसुम-सा फिरता रहता है,वो समझें मैं बर्बाद हुआऔर मैं,मैं देखता हूँ जब शख्स कोईतो सोचता हूँहर एक की वही रवानी है,वही सुबह अखबार में खोईदफ्तर से शाम थकी आईऔर रात को बड़ा गहरा ग़म हैमानोआती सुबह कोई मातम है,चाभी-भरी घड़ी हो जैसेआदमी भी चलता …

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address book, notebook, notes

ग़ज़ल:- जो जरूरी नहीं वो भी कर देखिए

जो जरूरी नहीं वो भी कर देखिएबस सियासी नशे में उतर देखिए नफ़रतों में जले घर कई रंग भरेघुल गया है नसों में ज़हर देखिए हर नज़र शक़ भरी हर डगर डर भरीटूटने में कहाँ है कसर देखिए आदमी से घिरा आदमी देखिएजी रहे सहरा का ये बसर देखिए दिल्ली दिल से कहे बिल नहीं …

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book, poems, persian poet

नज़्म:-‘जागते-जागते इक उम्र कटी हो जैसे’

जाने क्या बात इशारात करे है दिल मेंआहटें द्वार करे बेज़ार करे पल-पल मेंहिज़्र की रात में अक्सर ये गुमाँ होता हैवो है यहीं छुपके मुझे देख रही हो जैसेबंद आँखें यही महसूस किया करती हैकानों के करीब तेरी साँस उठी हो जैसेख़ाब की बात भी लगती है मुझे ख़ाबों-सीतुझको न देखके आँखें भी पिघलती …

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rose, blossom, bloom

गुलाब और तुम

पेड़ ने कब चाहा था,काँटों को,लेकिन,एक गुलाब खिलाने को,कितने काँटों को सींचा था,आसमाँ को ताकते गुलाब ने,कभी देखा ही नहीं,तुम भी तो नहीं जानती हो,तुम्हारे अनजाने रूठे मन को,मनाने को,तेरी मुस्कान का प्यासा मेरा मन,कितना रूठा है मुझसे

book, heart, pansies

टुकड़ा टुकड़ा प्यार

प्यार का न होना कोई बुरा नहींबिना प्यार के भी ज़िन्दा रह सकते हैंसूखे फूलों को सहेजा जा सकता हैबुरा है उसका पंखुड़ियों में बिखर जानाटुकड़ा टुकड़ा प्यार में कोई जी नहीं सकताजी भी ले फिर आदमी वो रह नहीं सकता इश्क़ हुआ था एक नादान को नादान सेतैरने से दोनों ही वो अनजान थे …

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tree, flowers, meadow

ग़ज़ल-जितने दर्दे-दिल के यहाँ फ़साने हैं

जितने दर्दे-दिल के यहाँ फ़साने हैंपास मेरे जीने के उतने बहाने हैं कौन कहता है मुश्किल मुहब्बत को पानाबस कायदे इश्क़ के ज़रा मनमाने हैं हम दोनों में कुई पहचान पुरानी हैवरना इस दुनिया में कितने अजाने हैं गरज़ है मेरी तेरे शिकवे सुनने कीतेरी आवाज़ के कान मेरे दिवाने हैं बादल अपनी तड़प गरज …

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notebook, is empty, pen

कोरोना और मंथन
(आकाश, नदी और मानव का)

मेरा रंग आसमानी हैमैं ये भूला था बरसों सेगए इन कुछ दिनों में परन जाने क्या हुआ ऐसामेरे दामन की सब कालिख़मिली थी जो मुझे जबरनमिटी कुछ इस सलीखे सेनदी को आईना करकेनिहारा मैंने जब खुद कोमुझे ऐसा लगा जैसेनया एक जन्म पाया होकि जैसे श्राप-मुक्ति सेपुनः देवत्व पाया हो मैं जीवनदायिनी सबकीमुझे माता पुकारें …

कोरोना और मंथन
(आकाश, नदी और मानव का)
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