सच कहता हूँ सुनो जरा तुम best hindi poem

सच कहता हूँ सुनो ज़रा तुम
यकीं न हो तो फ़र्ज़ करो तुम
जबसे तुमको देखा तबसे
रात में सपने आते हैं
सपने में तुम भी आई थी
अपने सपने में भटका मैं
यूँ ही तुमसे टकराया था
‘माफ कीजियेगा’ कहकर
तुम हौले से मुस्काई थी
सच कहता हूँ, बिल्कुल सच!
हाँ!तुम सपने में आई थी

सच कहता हूँ सुनो ज़रा तुम
यकीं न हो तो फ़र्ज़ करो तुम
तुम हौले से मुस्काई थी
मैं ठहरा-सा ठहर गया था
बहका-सा कुछ बहक गया था
कोई मुझे एहसास नहीं था
दिल धड़कन के साथ नहीं था
शायद,
तुमने आवाज़ लगाई थी
मेरा दिल भी ले आई थी
वही माँगने आया हूँ
और इसको लाने की ख़ातिर
थोड़ा-कुछ सूद भी चाहता हूँ
ये सुनके, हाँ-हाँ, ऐसे ही
तब भी तुम कुछ सकुचाई थी
सच कहता हूँ,बिल्कुल सच!
हाँ! तुम सपने में आई थी

सच कहता हूँ सुनो ज़रा तुम
यकीं न हो तो फ़र्ज़ करो तुम
तब भी तुम कुछ सकुचाई थी
जब मैंने तुमसे कहा था कि
दिल के बदले दिल ही लूँगा
तुमने ऐसे ही भौंह चढ़ाई थी
गुस्सा होने ही वाली थी
कुछ सोच के फिर चुप हो गई थी
और हँसकर फिर बोली थी तुम
‘कितना नाटक किया है तुमने
मुझसे बातें करने को
दिमाग खूब है तुम में
और सूरत के भी अच्छे हो
दोस्त बनोगे कहकर तुम
दोस्ती का हाथ बढ़ाई थी’
सच कहता हूँ बिल्कुल सच !
हाँ! तुम सपने में आई थी

सच कहता हूँ सुनो ज़रा तुम
यकीं न हो तो फ़र्ज़ करो तुम
जो फ़र्ज़ अभी तक किया है तुमने
सबकुछ बिल्कुल झूठा था
सच केवल इतना सा था कि
मैंने तुमको देखा था
वैसे तो सच कुछ भी नहीं
ये सारी दुनिया झूठी है
लेकिन, झूठा कैसे मानूँ इसे
जब मेरे सामने ही तू है
सो सच केवल इतना-सा है
इस झूठी दुनिया के भीतर
झूठा मैं झूठा मेरा दिल
झूठी वफ़ा वाला होकर
कसमें-वादे झूठे लेकर
झूठे प्यारे के चक्कर में
सच्ची में तुम पर आया है
सच कहता हूँ बिल्कुल सच!
हाँ दिल तुम पर ही आया है
सच कहता हूँ सुनो ज़रा तुम
यकीं करो अब फ़र्ज़ नहीं तुम
प्यार तुम्हीं पर आया है
सच्ची में तुम पर आया है…!


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