3 Best Motivational Stories in Hindi

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1. अपनी पहचान खुद बनाएं

एक प्रसिद्ध लेखक, पत्रकार और राजनयिक पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ जो बेहद ही हंसमुख स्वभाव और आकर्षक व्यक्तित्व के धनी हैं। उनकी पत्रकारिता देश ही नहीं अपितु विदेश में भी प्रसिद्ध है। उन्होंने ऐसी जगह पर भी पत्रकारिता की है जहां अन्य पत्रकारों के लिए संभव ही नहीं है। उनकी हंसमुख प्रवृत्ति और हाजिर जवाबी का कोई तोड़ नहीं है। एक समय की बात है पुष्पेंद्र एक सभा को संबोधित कर रहे थे, सभा में जनसैलाब उमड़ा हुआ था, लोग उन्हें सुनने के लिए दूर-दूर से इकट्ठे हुए थे।

जब वह अपना भाषण समाप्त कर बाहर निकले, तब उनकी ओर भीड़ ऑटोग्राफ के लिए बढ़ी। पुष्पेंद्र उनसे बातें करते हुए ऑटोग्राफ दे रहे थे। तभी एक नौजवान उस भीड़ से पुष्पेंद्र के सामने आया और उस नौजवान ने उनसे कहा:- “मैं आपका बहुत बड़ा श्रोता और प्रशंसक हूं , मैं साहित्य प्रेमी हूं,” जिसके कारण मुझे आपकी लेखनी बेहद अच्छी लगती है। इस कारण आप मेरे सबसे प्रिय लेखक भी हैं। मैंने आपकी सभी पुस्तकें पढ़ी है और आपके व्यक्तित्व को अपने जीवन में उतारना चाहता हूं। किंतु मैं ऐसा क्या करूं जिससे मैं एक अलग पहचान बना सकूं। आपकी तरह ख्याति पा सकूं।”

ऐसा कहते हुए उस नौजवान ने अपनी पुस्तिका ऑटोग्राफ के लिए पुष्पेंद्र की ओर आगे बढ़ाई।

पुष्पेंद्र ने उस समय कुछ नहीं कहा और उसकी पुस्तिका में कुछ शब्द लिखे और ऑटोग्राफ देकर उस नौजवान को पुस्तिका वापस कर दी।

इस पुस्तिका में यह लिखा हुआ था:-

“आप अपना समय स्वयं को पहचान दिलाने पर लगाएं ,

किसी दूसरे के ऑटोग्राफ से आपकी पहचान नहीं बनने वाली।

जो समय आप दूसरे लोगों को देते हैं

वह समय आप स्वयं के लिए निकालें।”

नौजवान इस जवाब को पढ़कर बहुत प्रसन्न हुआ और उसने पुष्पेंद्र को धन्यवाद देते हुए कहा कि –

“मैं आपकी सलाह जीवन भर याद रखूंगा और अपनी एक अलग पहचान बना कर दिखाऊंगा। “

पुष्पेंद्र ने उस नौजवान को धन्यवाद दिया और सफलता के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं दी।

इस हिंदी प्रेरक कहानी से हम क्या सीखते हैं?
  • दूसरों का अनुसरण करने के बजाय अपना खुद का विशिष्ट व्यक्तित्व और पहचान बनाएं।
  • फॉलो करने वाले को हमेशा टॉपर के साये में रहना होगा।
  • जीवन में सबसे बड़ी चीज है सम्मान (Respect) और अद्वितीयता (Uniqueness) जिसके लिए लोग आपको याद करते हैं।
  • तो फॉलो करना बंद करो। अनुयायी बनाना शुरू करें।

2. कोई काम छोटा-बड़ा नहीं होता 

एक समय की बात है एक गुरु अपने शिष्यों के साथ कहीं दूर जा रहे थे। रास्ता काफी लंबा था चलते-चलते सभी थक से गए थे। अब उन्हें विश्राम करने की इच्छा हुई, लेकिन विश्राम करते तो गंतव्य स्थल पर पहुंचने में अधिक रात हो जाती, इसलिए वह लोग निरंतर चल रहे थे। रास्ते में एक नाला आया जिसको पार करने के लिए लंबी छलांग लगानी थी। सभी लोगों ने लंबी छलांग लगाकर नाले को पार किया। किंतु गुरुजी का कमंडल उस नाले में गिर गया। सभी शिष्य परेशान हुए, एक शिष्य गोपाल कमंडल निकालने के लिए सफाई कर्मचारी को ढूंढने चला गया।

अन्य शिष्य बैठकर चिंता करने लगे, योजना बनाए लगे आखिर यह कमंडल कैसे बाहर निकाला जाए? गुरु जी परेशान होने लगे क्योंकि गुरुजी ने सभी को स्वावलंबन का पाठ पढ़ाया था। उनकी सीख पर कोई भी शिष्य अमल नहीं कर रहा है। अंत तक वास्तव में कोई भी उस कमंडल को निकालने के लिए अग्रसर नहीं हुआ, ऐसा देखकर गुरु जी काफी विचलित हुए। एक शिष्य मदन उठा और उसने नाले में हाथ डालकर देखा, किंतु कमंडल दिखाई नहीं दिया। क्योंकि वह नाले के तह में जा पहुंचा था तभी मदन अपने कपड़े संभालते हुए नाले में उतरा और तुरंत कमंडल लेकर ऊपर आ गया।

गुरु जी ने अपने शिष्य मदन की खूब प्रशंसा और सराहना की उसने तुरंत कार्य को अंजाम दिया और गुरु द्वारा पढ़ाए गए पाठ पर कार्य किया। तभी शिष्य गोपाल जो सफाई कर्मचारी को ढूंढने गया था वह भी आ पहुंचा, तब तक उसे अपनी गलती का आभास हो गया था।

इस हिंदी प्रेरक कहानी से हम क्या सीखते हैं?

कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता है , अपना काम स्वयं करना चाहिए।

किसी संकट में होने के बावजूद भी दूसरे व्यक्तियों से मदद कम से कम लेना चाहिए।

3. बड़ा बनने की चाह

एक छोटे से गाँव में शंभू शिल्पकार रहता था। वह पहाड़ों से बड़े-बड़े पत्थर तोड़कर लाता और उसे नया आकार देकर मूर्तियां बनाता। इस रोजगार में मेहनत बहुत ज्यादा थी, आमदनी बहुत कम।

दिन भर धूप पसीने में काम करते हुए शंभू पत्थर तोड़ता था। यह काम उसके पूर्वज भी करते थे।

शंभू काम करते हुए  सोचा करता था, यह छोटा-मोटा काम करने से क्या फायदा? ठीक से दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती। मैं बड़ा आदमी बन जाऊं तो काम भी ज्यादा नहीं करना पड़ेगा और बैठकर आराम से मौज करूंगा।

एक रोज वह एक नेता को देखता है, जिसके आगे पीछे हमेशा भीड़ रहती है। उसको हाथ जोड़कर प्रणाम करने वाले सैकड़ों लोगों की भीड़ खड़ी रहती है। शंभू ने नेता बनने की ठान ली, कुछ दिनों में वह नेता बन  भी गया।

नेता बनने के बाद जब वह एक रैली कर रहा था,  धूप बहुत तेज थी। धूप की गर्मी को वह सहन नहीं कर पाया और बेहोश होकर वहीं गिर गया।

होश आने पर उसने पाया कि वह बिस्तर पर लेटा हुआ है।

बिस्तर पर लेटे-लेटे वह सोचने लगा कि नेता से बलवान तो वह सूर्य है जिसकी गर्मी कोई सहन नहीं कर पाता। अब मुझे सूर्य बनना है। कुछ दिनों बाद वह सूर्य भी बन गया।

शंभू अब गर्व से चमकता रहता और बहुत तेज गर्मी उत्पन्न करता। तभी उसने देखा कि एक मजदूर खेत में आराम से काम कर रहा है। उसने गर्मी और बढ़ाई मगर मजदूर पर कोई असर नहीं पड़ा। फिर उसने विचार किया तो उसे मालूम हुआ कि ठंडी-ठंडी हवा पृथ्वी पर बह रही है, तब शंभू ने विचार किया। हवा बनकर मैं और शक्तिशाली बन जाऊंगा, कुछ दिनों बाद वह हवा भी बन गया।

हवा बनकर वह इतराता-इठलाता इधर-उधर घूमने लगा।

अचानक उसके सामने विकराल पर्वत आ गया, जिसको वह पार नहीं कर सका। तब उसने सोचा मैं इससे भी बड़ा पर्वत बनकर दिखाऊंगा। कुछ समय बाद वह विशालकाय पर्वत भी बन गया।

अब उसे अपने आकार और शक्तिशाली होने का घमंड होने लगा।

कुछ दिनों बाद उसे छैनी-हथौड़ी की आवाज परेशान करने लगी।

वह काफी परेशान हो गया, उसकी आवाज इतनी कर्कश थी कि उसके शरीर को तोड़े जा रही थी।

आंख खुली तो उसने देखा एक शिल्पकार उसके पर्वत को तोड़ रहा है।

लेकिन अब वह मजदूर नहीं बनना चाहता था। वह काफी परेशान था, नींद खुली तो उसने आईने में पाया –

वह जो विशाल पर्वत को भी तोड़ने का साहस रखता है, वह तो स्वयं वही है।

इस हिंदी प्रेरक कहानी से हम क्या सीखते हैं?
  • कोई भी छोटा या बड़ा नहीं होता है, सभी के कार्य अपने-अपने हैं।
  • किसी भी कार्य को करने में हिचकिचाना नहीं चाहिए बल्कि गर्व का अनुभव करना चाहिए।
  • ज्यादा बड़े बनने की चाह नहीं रखनी चाहिए।

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