ग़ज़ल-जितने दर्दे-दिल के यहाँ फ़साने हैं

tree, flowers, meadow

जितने दर्दे-दिल के यहाँ फ़साने हैं
पास मेरे जीने के उतने बहाने हैं

कौन कहता है मुश्किल मुहब्बत को पाना
बस कायदे इश्क़ के ज़रा मनमाने हैं

हम दोनों में कुई पहचान पुरानी है
वरना इस दुनिया में कितने अजाने हैं

गरज़ है मेरी तेरे शिकवे सुनने की
तेरी आवाज़ के कान मेरे दिवाने हैं

बादल अपनी तड़प गरज के जताता है
बरस के धरती को अपने हाल सुनाने हैं

अभी वक़त है जाँना हम जी लेते हैं
एक जवानी में सदियों के जमाने हैं

किसी की बुरी नियत से मैं सुर्खी में हूँ
किस पाजी के इतने ख़राब निशाने हैं

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