ग़ज़ल:- जो जरूरी नहीं वो भी कर देखिए

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जो जरूरी नहीं वो भी कर देखिए
बस सियासी नशे में उतर देखिए

नफ़रतों में जले घर कई रंग भरे
घुल गया है नसों में ज़हर देखिए

हर नज़र शक़ भरी हर डगर डर भरी
टूटने में कहाँ है कसर देखिए

आदमी से घिरा आदमी देखिए
जी रहे सहरा का ये बसर देखिए

दिल्ली दिल से कहे बिल नहीं मिल नहीं
इस सियासी ख़बर में नज़र देखिए

साधु ऐसा कहे मौलवी ये कहे
काम की हर ख़बर मुख़्तसर देखिए

एकता को बहुत गंदी बातें दिखी
आप दिन में नहीं रात भर देखिए

दिख रही है हक़ीक़त यहीं पर मगर
हम उधर देखेंगे आप उधर देखिए

ज़िन्दगी जिन ग़मों में कटी बेश्तर
वाहवाही उन्हीं शेर पर देखिए

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