हसरतों की कोई हद तो दिखती नहीं

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हसरतों की कोई हद तो दिखती नहीं
झील ये चाहती है कि सागर मिले
आँख ढूँढ़े कोई तेरी तस्वीर हाँ
दिल से मैंने कहा अब तू आहें न भर
रात है ये ज़रा सी गुजर जाने दे
वो सवेरा है रातों को धो जाएगी

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