अरेंज मैरिज

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ख़ुदा का करम या
कहो इश्क़ का सितम
तुम्हें मिलना था इस तरह
सबकी रज़ा अपनी खुशी
ये करामातें इश्क़ की
न-जान सका कोई
पहचान सका कोई
कभी जंगल-सी उगती है
कभी गमलों में खिलाई गई
रास्ते खुद ही चुनती है
दिल में आप महकती है
या महक दिल तक पहुँचाती है
तेरे-मेरे मिलने का दूसरा ज़रिया था
तुमको मुझ तक पहुँचाया गया
मुझको तुमसे मिलवाया गया
पर हमारा मिलना बाकी है
दो का एक हो जाने तक
हमारा एक हो जाना बाकी है
ये जो रस्म अंगूठी की
हमने अदा कर दी
महज़ एक कच्चा रंग चढ़ा
हमारे पक्के रिश्ते पर

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