कभी कभी दिल घबराएगा

heidelberg, autumn, view

कभी कभी दिल घबराएगा
सब कुछ बेजा नज़र आएगा
तन्हाई घेरे जो कभी, तो
हाथ तलाशे साथ कहीं, तो
आँखों में सागर उतरे, तो
कतरा-कतरा दिल बिखरे, तो
परछाई जब साथ नहीं दे
जान रहे पर साँस नहीं ले
जिस्म से जैसे रूह भी छूटे
तेरा तुझसे रब्त भी टूटे
दूर तलक़ कुछ नज़र न आये
वीराना हर स्वप्न जलाए
तब तुम मुझको याद में लाना
मेरे इश्क़ की शमअ जलाना

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