सावधान! अगर आप भी अपने Mobile को सोते समय अपने पास रखते हैं तो ऐसा करना आज से ही बंद कर दें।

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आज के समय में मोबाइल हमारी ज़िंदगी का एक बहुत अहम हिस्सा बन गया है। सुबह उठने के से रात को सोने तक हम अपने दिनभर के कामों के लिए मोबाइल पर निर्भर हो चुके हैं। चाहे अलार्म लगाना हो, रिमाइंडर सेट करना हो या किसी से बात करनी हो, सभी कामों के लिए मोबाइल हमारे हाथ में ही रहता है। लेकिन जैसे-जैसे मोबाइल फोन के Features बढ़ रहे हैं, रात में मोबाइल फोन तकिए के नीचे रखकर सोने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ रही है। ऐसा है कि बिना मोबाइल फोन यूज़ किए या कोई सीरीज़ या वीडियो देखे कई लोगों को नींद ही नहीं आती है। मोबाइल फोन ने हमारी life तो आसान कर दी है लेकिन यह धीरे-धीरे हमारी उम्र कम कर रहा है। मोबाइल फोन से निकलने वाली Radiation हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक (harmful) होती हैं। इससे डिप्रेशन, स्ट्रेस और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी होने का भी खतरा और बढ़ जाता है है। 

अगर आपको भी सोते समय मोबाइल पास रख कर सोने की आदत है तो इसे जल्द ही छोड़ दें क्योंकि यह आपकी सेहत को बहुत नुकसान पहुंचा सकती है। आज के इस post में हम आपको बताने जा रहे हैं कि सोते समय मोबाइल फोन पास रख कर सोने से क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं। 

पर्याप्त नींद न ले पाने की समस्या:-

रात को हमारे शरीर में मेलाटोनिन (Melatonin) नाम का हार्मोन निकलता है जो शरीर को नींद के लिए तैयार करता है। लेकिन रात के समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से फोन से निकलने वाली रेडिएशन के कारण यह हार्मोन सही ढंग से निकल नहीं पाता है और अनिद्रा की समस्या होती है। जब हम अपने सेल फ़ोन को अपने पास रख कर सोते है तो उसके वाइब्रेशन या आवाज से हमारी नींद बाधित हो सकती है। हम एक सुकून भरी नींद ले कर नही सो पाते है। साथ ही साथ जब हम सुबह उठते है तो हम चाहते है की हम एकदम तरोताजा महसूस करे। लेकिन मोबाइल फ़ोन को अपने पास रख कर सोने से हमारी नींद पूरी नही हो पाती है। जिसके रहते हम थका हुआ (Weakness) महसूस करते है। साथ ही ये हमारे सोने के पैटर्न को भी change करता है। साथ ही कोई मैसेज या कॉल आने पर फ़ोन ब्लू लाइट छोड़ता है जो एक सनलाइट की तरह होती है। जिस से हमारे दिमाग को सोते समय भी आराम नही मिल पाता है। इसलिए अच्छा है की सोते समय आप अपने सेल फ़ोन को बंद कर दे या उसे किसी दुसरे रूम में रख दें।

Electromagnetic Radiation (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन) निकलता है:-

एक अध्ययन में ये साबित हो चुका है कि Cell Phone को अपने पास रख कर सोने से हार्ट की कई बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। हालांकि इस से निकलने वाला रेडिएशन कम होता है लेकिन ये x -ray या माइक्रोवेव से निकलने वाले रेडिएशन के बराबर ही होता है। मोबाइल फोन में से लगातार विद्युत चुम्बकीय विकिरण उत्सर्जन होती है। किसी भी तरह की मानसिक या हृदय सम्बन्धी समस्या से जूझना  नहीं चाहते हैं तो अपने स्मार्टफोन को खुद से दूर रखें।

स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन को दबा देती है:-

आपके स्मार्ट फोन से निकलने वाली नीली रोशनी न केवल आपकी दृष्टि के लिए खराब है, बल्कि यह आपके दिमाग के लिए भी खराब है। डॉ. वालिया का कहना है कि शोध में मेलाटोनिन के दबे हुए स्तर और नीली रोशनी के संपर्क में आने के बीच संबंध पाया गया है। मेलाटोनिन एक हार्मोन है जो आपके नींद-जागने के चक्र को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार है। इसलिए जब आपका शरीर इस पर कम चलता है, तो आप अनिद्रा, दिन में थकान और चिड़चिड़ापन का अनुभव कर सकते हैं।

आपके फ़ोन की नीली बत्ती एक कृत्रिम रंग है जो दिन के उजाले की नकल करता है। यह दिन के दौरान बहुत अच्छा हो सकता है क्योंकि यह आपको अधिक सतर्क महसूस करा सकता है, लेकिन यह रात में आपको जो चाहिए, उसके ठीक विपरीत है।

नीली रोशनी के संपर्क में आने से आपकी आंतरिक शारीरिक घड़ी प्रभावित हो सकती है और आपकी सर्कैडियन लय खराब हो सकती है। यह लय प्रकाश और अंधेरे के अनुरूप है। यही कारण है कि जब सूरज ढलने लगता है तो आप रात में अधिक थका हुआ महसूस करते हैं और सुबह के प्रकाश में आप अधिक ऊर्जावान महसूस करते हैं।

दिमाग पर पड़ता है नकारात्मक प्रभाव:-

अगर आप भी रात को सोते समय मोबाइल फोन तकिए के नीचे या सीने पर रखकर सोते हैं तो अपनी ये आदतें जल्द ही छोड़ दें क्योंकि ये आपके लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। रात के समय मोबाइल पास रखकर सोने से दिमाग पर भी नकारात्मक प्रभाव होता है।

बढ़ जाता है शरीर में स्ट्रेस हॉर्मोन का स्तर:-

रात के समय मोबाइल फोन से दूर रहें क्योंकि इसके ज़्यादा इतेमाल से शरीर में कोर्टिजोन नामक स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ता है और आप नींद के दौरान भी तनाव में रहते हैं।

बिगड़ सकता है डीएनए का स्ट्रक्चर:-

मोबाइल फोन को हमेशा शरीर से चिपका कर रखने से आपके डीएनए का स्ट्रक्चर भी बिगड़ सकता है। 

देता है डिप्रेशन और तनाव को जन्म, मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडिएशन से दिमाग पर बुरा असर पड़ता है। इससे दिमाग की नसें सिकुड़ने लगती हैं जिसके कारण दिमाग में ऑक्सीजन की सही मात्रा नहीं पहुँच पाती है। मोबाइल फोन की रेडिएशन के दुष्प्रभाव के कारण ही आजकल लोगों में डिप्रेशन और तनाव जैसी बीमारियों का स्तर बढ़ता जा रहा है। 

डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा ज्यादा:-

रात में मोबाइल फोन पास रख कर सोने से ना केवल कैंसर जैसी बीमारी का खतरा रहता है, बल्कि इससे डाइबिटीज और हृदय रोगों की संभावना भी कई गुणा बढ़ जाती है। चाहे रात में जरूरी ईमेल चेक करना हो, बात करते-करते सो जाना या फिर फोन में अलार्म लगाकर सिरहाने रखना हो, फोन को साथ लेकर सोने की आपकी आदत सेहत की नजर से कई खतरे की वजह हो सकती है।

Research क्या कहती है?

  • लंदन के द स्लीप स्कूल के शोधकर्ता डॉ. गाय मीडोज ने अपने शोध के आधार पर माना है कि सोते वक्त पास फोन रखने से हमारा मस्तिष्क नींद के दौरान भी अतिसक्रिय बनाता है जिससे नींद से जुड़ी दिक्कतें होती हैं और आप तनाव मुक्त नहीं हो पाते हैं।
  • हावर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता चार्ल सिजलर के अनुसार, ”रात में सोते वक्त मोबाइल फोन पास रखने का प्रभाव शरीर के प्राकृतिक व्यवहार को प्रभावित करता है। इससे मस्तिष्क को दिन और रात का अंतर तय करने में भ्रम हो सकता है।”
  • ऐसी स्थिति में शरीर में मेलाटोनिन नामक हार्मोन के नियंत्रण पर प्रभाव पड़ता है जिससे कॉर्टिजोन नामक स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ता है और आप नींद के दौरान भी तनाव में रहते हैं।

तो आपको क्या करना चाहिए:-

यदि आप एक रात के समय प्रौद्योगिकी (Technology) उपयोगकर्ता हैं, तो सोने के समय के करीब उपयोग के लिए कुछ नियम निर्धारित करना महत्वपूर्ण है।

  • डॉ. वालिया सोने से 1 घंटे पहले स्क्रीन टाइम काटने की सलाह देते हैं, लेकिन उनका कहना है कि सोने से ठीक 30 मिनट पहले इसे बंद करने के और भी फायदे हैं। और निश्चित रूप से स्मार्ट फोन आमतौर पर मुख्य अपराधी होते हैं, लेकिन यहां तक ​​कि टैबलेट और टीवी भी नीली रोशनी का उत्सर्जन कर सकते हैं जो खराब नींद में योगदान कर सकते हैं।
  • आराम से सोने की दिनचर्या स्थापित करना और गतिविधियों को हतोत्साहित करना महत्वपूर्ण है जिससे चिंता या उच्च भावनात्मक प्रतिक्रिया हो सकती है। डॉ. वालिया रात की गतिविधियों को चुनने की सलाह देते हैं जो नींद को बढ़ावा देती हैं।
  • यदि आप वास्तव में सोने से पहले स्क्रीन समय सीमित करने के साथ संघर्ष कर रहे हैं, तो अपने फोन को एक अलग कमरे में रखने का प्रयास करें और अपने बेडसाइड टेबल के लिए एक घड़ी रेडियो में निवेश करें। ध्यान भटकाने और सूचनाओं को कम करने के लिए आपके फोन के भीतर विकल्प भी हैं (जैसे इसे ‘नाइट मोड’ पर सेट करना) जो आपको स्नूज़ करने के मूड में लाने में मदद कर सकते हैं।

आप इन तरीकों को भी आजमा सकते हैं:-

बेडरूम से फोन हटाएं Mobile Phone:-

फोन को किसी दूसरे room में चार्ज करने के लिए रखें। अपने आप को अपने फोन के बिना बिस्तर पर जाने दें। यदि कोई आपात स्थिति है, तो आप इसके बारे में सुबह तक जान ही जाएंगे। फोन को बेडरूम से हटाकर और इसे दूसरे कमरे में चार्ज करने के लिए रखकर, आपकी नींद पर इसके प्रभाव को कम करना संभव है।

अलार्म घड़ी का use करें:-

अपने फ़ोन के अलार्म का उपयोग करने के बजाय एक अलार्म घड़ी प्राप्त करें। हालांकि फोन बहुत कुछ कर सकते हैं। अगर आपको सुबह समय पर जागने की जरूरत है तो एक सस्ती अलार्म घड़ी खरीदें। इसे कमरे में रखें और उस समय पर सेट करें जब आपको उठने की जरूरत है।

जितना हो सके, घड़ी को न देखें और न ही रात में समय देखें। यदि आपको अपने फोन को अलार्म घड़ी (शायद यात्रा करते समय) के रूप में उपयोग करना चाहिए, तो व्यवधानों को कम करने और इसे पहुंच से बाहर रखने के लिए इसे हवाई जहाज या रात मोड (Airplane Mode/Night Mode) पर सेट करें।

स्लीप-ट्रैकिंग ऐप्स बंद करें:-

कुछ लोग अपने फोन का उपयोग विभिन्न ऐप या यहां तक ​​कि पहनने योग्य तकनीक के साथ नींद और जागने के पैटर्न को ट्रैक करने के लिए करते हैं। तो ऐसा करना आज से ही बंद कर दें।

बफर जोन बनाएं:-

बफर जोन बनाए रखें और रात में रोशनी कम से कम करें। आराम करने और सोने के लिए तैयार होने के समय के रूप में अपने सोने के समय से पहले आखिरी घंटे (या दो घंटे) की saving करने का प्रयास करें। कुछ समय पढ़ने, टेलीविजन या फिल्म देखने या संगीत सुनने में बिताएं।

नींद के environment का अनुकूलन (customization) करें:-

अन्य तरीकों पर विचार करें कि आप अपने bedroom को अंतिम नींद के लिए बढ़ा सकते हैं। नींद आने पर बिस्तर पर जाएं। यदि आप रात में 20 मिनट से अधिक समय तक जागते हैं, तो उठें और कुछ आराम करें और नींद आने पर बिस्तर पर लौट आएं।

यदि आप सुबह के समय जाग रहे हैं, तो आप उठ सकते हैं और अपने दिन की शुरुआत जल्दी कर सकते हैं। बिस्तर को अकेले सोने और सेक्स के लिए जगह के रूप में सुरक्षित रखें। इन परिवर्तनों को करने से, आप सोने के स्थान के रूप में बिस्तर की संगति में सुधार करेंगे।

Disclaimer: इस post के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

आपको हमारी ये पोस्ट कैसी लगी हमें जरूर बताएं।

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