इश्क़ करें कह न सकें दूरी भी सह न सकें Best Hindi Poem

ऊँचे लोगों को तन्हाई ज़्यादा खलती है
वर्ना बादल बूँद-बूँद हो बिखरे नहीं होते

इश्क़ करें कह न सकें दूरी भी सह न सकें
इतने पर भी दीवाने रुलाये नहीं रोते

घर से दफ़्तर दफ़्तर से घर रोज यही चक्कर
मगर हक़ीक़त भरी भीड़ में ख़ाब नहीं खोते

हमारे लिए पल भर को भी रोते नहीं हो तुम
तुम्हारे लिए इक पल को भी हम नहीं रोते

नाम न पूँछों वो जो भी था उसके बाद
वाँ पर तुम नहीं सोते याँ पर हम नहीं सोते

सब पूँछे इस चहरे की रौनक का राज
बस इतनी सी बात मियाँ हम ग़म नहीं ढोते

सूरज तन्हा है उसने बदला नहीं ख़ुद को
कोई हमारा नहीं होता किसी के हम नहीं होते


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